
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन ने हाल ही में दिवंगत अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार के निधन पर अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने न सिर्फ अपने भावनात्मक लगाव को बयान किया, बल्कि यह भी बताया कि कैसे मनोज कुमार उनके जीवन और करियर में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे।
मनोज कुमार के निधन की खबर सुनकर रवीना सीधे उनके घर पहुंचीं, जहां उन्होंने उनके बेटे और परिवार से मुलाकात की। मीडिया से बातचीत करते हुए रवीना ने याद किया कि कैसे मनोज कुमार ने उनके पिता को फिल्मों में पहला अवसर दिया था। उनके लिए मनोज कुमार केवल एक सीनियर अभिनेता नहीं, बल्कि एक पिता समान शख्सियत थे। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकारों के लिए वे गुरु थे और इंसान के तौर पर भी बेहद खास।
रवीना ने आगे कहा कि वह मनोज कुमार को उनकी पसंदीदा तीन चीज़ों के माध्यम से अंतिम श्रद्धांजलि देना चाहती हैं। ये चीजें थीं - महाकाल की रुद्राक्ष माला, साईं बाबा की विभूति और भारतीय ध्वज। इन तीनों प्रतीकों के माध्यम से रवीना ने मनोज कुमार की भारतभूमि, आध्यात्मिकता और देशभक्ति के प्रति अटूट प्रेम को सम्मानित किया।
अपने शब्दों में रवीना ने कहा, “मैं मनोज कुमार अंकल को बहुत वर्षों से जानती हूं। उन्होंने ही मेरे डैड को फिल्मों में पहला ब्रेक दिया था। वह हम सभी के लिए पिता जैसे थे। आज जब मैं उनके लिए उनकी सबसे प्यारी चीजें लेकर आई हूं - रुद्राक्ष माला, विभूति और तिरंगा - तो ऐसा लगता है जैसे मैं उन्हें वही लौटा रही हूं जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय था। मेरे लिए वह भारत थे और हमेशा रहेंगे। उनके द्वारा बनाई गई फिल्मों जैसी प्रेरणादायक कहानियां और कोई नहीं बना पाया। उनका हर एक गाना मुझे याद है, लेकिन 'जब जीरो दिया मेरे भारत ने' मेरा सबसे प्रिय है। वह हमारे लीजेंड हैं और हमेशा रहेंगे।”
फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने भी इस दुखद घटना पर शोक जताया और कहा कि मनोज कुमार के जाने से एक पूरा युग समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक कलाकार का जाना नहीं है, बल्कि एक सोच, एक युग का अंत है। मनोज जी न केवल बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक महान फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने जिस तरह से सामाजिक मुद्दों को अपनी फिल्मों में पिरोया, वह आज भी अद्वितीय है। उनकी फिल्में हमेशा दिलों को छू जाती थीं। मैंने उनकी ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘पूरब और पश्चिम’, और ‘क्रांति’ जैसी फिल्में देखी हैं - ये फिल्में दर्शकों के दिल में हमेशा रहेंगी। वह एक ऐसे दौर का चेहरा थे जब पूरा देश उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता था।”
मनोज कुमार का योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिट रहेगा। उन्होंने देशभक्ति, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को परदे पर उतारकर न केवल फिल्मों का चेहरा बदला, बल्कि लोगों के दिलों को भी छुआ। उनका जाना एक ऐसी खाली जगह छोड़ गया है, जिसे भर पाना मुश्किल है।