
West Bengal teacher recruitment scam : पश्चिम बंगाल में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसने राज्य की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें लगभग 25,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इस फैसले ने शिक्षा विभाग में हुए व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: नियुक्तियां अवैध और दूषित घोषित
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार शामिल थे, ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन नियुक्तियों की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण और भ्रष्टाचार से दूषित रही है। कोर्ट ने न केवल नियुक्तियों को अवैध ठहराया बल्कि उन्हें रद्द करने का आदेश भी दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कर्मचारियों को अब तक दिए गए वेतन और भत्तों को लौटाने की जरूरत नहीं है।
राज्य सरकार की याचिका खारिज, हाईकोर्ट का आदेश कायम
राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2024 के फैसले को पूरी तरह से सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता क्योंकि नियुक्तियों में धोखाधड़ी और जालसाजी साबित हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्य करार दिया गया।
नियुक्ति प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण और भ्रष्ट बताया गया।
दिव्यांग कर्मचारियों को मानवीय आधार पर नौकरी में बने रहने की छूट दी गई।
अन्य सभी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश।
नई चयन प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की सीबीआई जांच को रोकने की याचिका पर सुनवाई के लिए 4 अप्रैल की तारीख तय की।
भर्ती प्रक्रिया की साख पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। कोर्ट ने यह भी बताया कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर धांधली, जालसाजी और भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नौकरी से वंचित रहना पड़ा।
नई चयन प्रक्रिया की समयसीमा तय
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस नई प्रक्रिया में वे सभी उम्मीदवार, जिन पर कोई दाग नहीं है, विशेष छूट के साथ भाग ले सकेंगे। हालांकि, उन्हें पुरानी नियुक्ति की अवधि का लाभ नहीं मिलेगा।
मानवीय दृष्टिकोण से दिव्यांग उम्मीदवारों को राहत
कोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि वे नौकरी में बने रह सकते हैं। यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया है ताकि समाज के कमजोर वर्ग को अनावश्यक कष्ट न उठाना पड़े।
सीबीआई जांच जारी रहेगी
पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन सीबीआई को जांच जारी रखने का निर्देश दिया था। अब भी कोर्ट ने इस जांच को पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।