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Temple Vastu Shastra: आजकल लकड़ी के बने मंदिर काफी लोकप्रिय हैं और बहुत से लोग अपने घर में लकड़ी का मंदिर रखते हैं. हालांकि इससे संबंधित वास्तु के नियमों का पालन करना जरूरी होता है.1. हिंदू धर्म में पूजा का महत्व 

1. हिंदू धर्म में पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष स्थान है। यह सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम भी है। यही कारण है कि ज्यादातर लोग दिन की शुरुआत भगवान का नाम लेकर करते हैं। पूजा के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं—कई लोग घर में ही एक छोटा मंदिर बनाकर नियमित पूजा करते हैं।

2. घर में मंदिर की परंपरा और महत्व

घर में मंदिर रखना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र भी होता है। मान्यता है कि घर में मंदिर होने से देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है, घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार संगमरमर, धातु या लकड़ी के मंदिर घर में रखते हैं।

3. आजकल क्यों लोकप्रिय हो रहे हैं लकड़ी के मंदिर

हाल के वर्षों में लकड़ी के मंदिरों की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि लकड़ी के मंदिर देखने में बेहद सुंदर होते हैं और इन्हें सजाना भी आसान होता है। साथ ही, इनका डिज़ाइन भी घर की आंतरिक सजावट के अनुरूप ढाला जा सकता है।

4. वास्तु शास्त्र में लकड़ी के मंदिर के नियम

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो घर की हर चीज़ की दिशा और स्थिति को लेकर नियम बताता है। अगर इन नियमों का पालन किया जाए तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लकड़ी के मंदिर को लेकर भी वास्तु में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

5. किस लकड़ी का मंदिर रखें? – सही विकल्प का चुनाव

लकड़ी के मंदिर बनवाते या खरीदते समय यह बेहद जरूरी है कि सही लकड़ी का चुनाव किया जाए। वास्तु के अनुसार मंदिर के लिए शीशम या सागवान की लकड़ी उत्तम मानी जाती है। इन लकड़ियों की खासियत यह है कि ये टिकाऊ होती हैं और इन पर दीमक का असर भी कम होता है।

  • शीशम की लकड़ी: मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक होती है। इसका रंग गहरा भूरा होता है जो मंदिर को रॉयल लुक देता है।
  • सागवान की लकड़ी: यह बेहद मजबूत होती है और मौसम के प्रभाव को झेल सकती है।

क्या न करें: कभी भी प्लाईवुड या सस्ती लकड़ी का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनमें दीमक लगने का खतरा ज्यादा होता है।

सावधानी: मंदिर को दीमक से बचाने के लिए समय-समय पर पॉलिश या वार्निश करवाना चाहिए। यह न केवल उसे सुरक्षित रखता है बल्कि उसकी सुंदरता भी बनाए रखता है।