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Technology : अगर आप भी उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो रात को बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल फोन स्क्रॉल करना जरूरी समझते हैं, तो आपको अपनी इस आदत पर तुरंत लगाम लगाने की जरूरत है। एक लंबे और विस्तृत अध्ययन में यह साफ तौर पर सामने आया है कि सोने से पहले फोन का इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। ये असर केवल नींद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और यहां तक कि बच्चों के विकास पर भी पड़ सकता है।

1. क्या कहती है रिसर्च?

हाल ही में ‘JAMA’ नामक प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका में एक शोध प्रकाशित हुआ, जिसमें लगभग 1.22 लाख लोगों को दो वर्षों तक ट्रैक किया गया। इस रिसर्च का मकसद यह समझना था कि रात को सोने से पहले फोन या स्क्रीन का इस्तेमाल किस हद तक नींद को प्रभावित करता है।

रिपोर्ट में यह सामने आया कि जो लोग सोने से ठीक पहले फोन देखते हैं, उनकी नींद की गुणवत्ता लगभग 33% तक कम हो जाती है। यानी, भले ही आप आठ घंटे सो रहे हों, लेकिन उस नींद का असर वैसा नहीं होगा जैसा बिना स्क्रीन के सोने पर होता है।

2. सभी उम्र के लोगों पर असर

यह रिसर्च खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें हर उम्र के लोगों को शामिल किया गया – छोटे बच्चे, किशोर, वयस्क और बुजुर्ग। सभी में एक बात कॉमन थी – सोने से पहले स्क्रीन देखने वालों की नींद पर नकारात्मक असर पड़ा। बच्चों और किशोरों में ये असर और भी गहरा पाया गया। उनकी एकाग्रता, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके दुष्परिणाम दिखे।

3. नींद का समय हुआ कम

शोध में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई – जो लोग सोने से पहले फोन का इस्तेमाल करते हैं, वे सप्ताह में औसतन 50 मिनट कम नींद लेते हैं। खासकर सप्ताह के दिनों में, जब काम या स्कूल का प्रेशर अधिक होता है, उस समय नींद की कमी का सीधा असर उनकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। थकावट, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण आम हो जाते हैं।

4. सिर्फ मात्रा नहीं, गुणवत्ता भी प्रभावित

यहां सिर्फ नींद के घंटे ही कम नहीं हो रहे, बल्कि जो नींद मिल रही है, उसकी गुणवत्ता भी गिर रही है। स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) मेलाटोनिन नामक हार्मोन को प्रभावित करती है, जो हमारे शरीर की नींद-जागने की प्राकृतिक घड़ी को नियंत्रित करता है। इसका मतलब ये हुआ कि जब आप रात में फोन देखते हैं, तो आपका शरीर नींद को तैयार ही नहीं कर पाता।

5. लाइट बंद कर फोन चलाना है और खतरनाक

कई लोग सोचते हैं कि अगर कमरे की लाइट बंद कर दी जाए और फिर फोन इस्तेमाल किया जाए, तो असर कम होगा। लेकिन सच इसके उलट है। अंधेरे में स्क्रीन की रोशनी आंखों पर और ज्यादा जोर डालती है, जिससे आंखों में जलन, थकान और यहां तक कि सिरदर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक ऐसा करना आंखों की रोशनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।