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US Tariff impact : अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 26% के टैरिफ से भारतीय निर्यातकों को तगड़ा झटका लग सकता है। लेकिन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय का मानना है कि भारत की स्थिति अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अब भी बेहतर बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि हमें इस निर्णय के प्रभाव का मूल्यांकन करने की जरूरत है। हालांकि, अमेरिका ने कई देशों पर जवाबी शुल्क लगाए हैं, और भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें सबसे कम शुल्क का सामना करना पड़ा है। वियतनाम, चीन, इंडोनेशिया, म्यांमार जैसे देशों की तुलना में भारत को कम नुकसान होगा। इस फैसले का असर तो जरूर पड़ेगा, लेकिन भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत है।

द्विपक्षीय व्यापार समझौते से मिल सकती है राहत

अजय सहाय को उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच जो द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही है, वह जल्द ही अंतिम रूप लेगा। अगर यह समझौता होता है, तो इससे इन जवाबी शुल्कों से राहत मिलने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पर जो शुल्क लगाया गया है, वह कई देशों की तुलना में कम है। इससे भारत को प्रतिस्पर्धा में फायदा मिल सकता है।

अमेरिका का आरोप – भारत अत्यधिक टैरिफ वसूलता है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की घोषणा करते हुए भारत को ‘बहुत सख्त’ बताया। ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 52 प्रतिशत तक का शुल्क वसूलता है, जो कि अनुचित है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं, लेकिन व्यापारिक मामलों में भारत अमेरिका के साथ न्याय नहीं कर रहा। इसी के चलते अमेरिका ने 26 प्रतिशत का ‘रियायती जवाबी टैरिफ’ लगाने का फैसला किया है। ट्रंप ने इसे ‘अमेरिकी उद्योग के पुनर्जन्म का दिन’ बताया।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने अमेरिका के साथ 35.32 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) दर्ज किया। यह अधिशेष 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब डॉलर था। अमेरिका, वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक लगातार भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18%, आयात में 6.22% और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% है।

इस टैरिफ का असर जरूर दिखेगा, लेकिन अगर दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत जल्द किसी नतीजे पर पहुंचती है, तो इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सकती है।