
Who is Vipraaj Nigam : क्रिकेट की दुनिया में कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो इतिहास में दर्ज हो जाते हैं – और दिल्ली कैपिटल्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स का यह मुकाबला भी कुछ ऐसा ही था। लक्ष्य था 210 रन, सामने थी एक मजबूत टीम, लेकिन फिर मैदान पर उतरे दो जिद्दी खिलाड़ी – आशुतोष शर्मा और विप्रज निगम – जिन्होंने न केवल हारी हुई बाज़ी पलटी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जज़्बा और मेहनत हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं।
विप्रज निगम: नए सितारे का उदय
कौन हैं विप्रज निगम?
विप्रज निगम का नाम भले ही अभी क्रिकेट की बड़ी सुर्खियों में नहीं हो, लेकिन उनका सफर प्रेरणादायक है। उत्तर प्रदेश में 28 जुलाई 2004 को जन्मे विप्रज को दिल्ली कैपिटल्स ने 50 लाख रुपये में खरीदा, और यह खरीद IPL के इतिहास में एक समझदारी भरा निवेश बनकर उभरी।
उनका पहला ब्रेक सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी से मिला, जहां उन्होंने 8 विकेट चटकाकर अपने टैलेंट की झलक दिखाई। हालाँकि उन्हें बल्लेबाजी का ज्यादा मौका नहीं मिला, लेकिन आंध्र प्रदेश के खिलाफ खेले गए एक मैच में उन्होंने सिर्फ 8 गेंदों पर 27 रन ठोककर सभी को चौंका दिया।
ऑलराउंडर की छवि
विप्रज मूलतः लेग स्पिन गेंदबाज हैं, लेकिन उनकी बल्लेबाज़ी भी किसी सरप्राइज पैकेज से कम नहीं। वो निचले क्रम में आकर भी बड़े-बड़े शॉट लगाने की क्षमता रखते हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में भी उन्होंने जबरदस्त संयम और आत्मविश्वास दिखाया, जिससे टीम को जीत की राह मिल गई।
अब तक के छोटे से प्रथम श्रेणी करियर में उन्होंने 3 मैचों में 17 विकेट चटका चुके हैं, और यही फॉर्म उन्हें IPL में भी चमकाने लगी है। वे नए युग के ऑलराउंडर हैं – चुपचाप आकर मैच का पासा पलट देने वाले।
आशुतोष शर्मा: एक साधारण लड़के की असाधारण कहानी
रतलाम से दिल्ली तक का सफर
आशुतोष शर्मा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। मध्य प्रदेश के रतलाम में जन्मे आशुतोष का क्रिकेट के प्रति जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने सिर्फ 8 साल की उम्र में इंदौर जाकर क्रिकेट कोचिंग शुरू कर दी। उनके पास ना रहने की जगह थी, ना खाना – लेकिन था सिर्फ एक सपना।
कई रातें उन्होंने भूखे पेट काटीं, और अपनी पढ़ाई तथा ट्रेनिंग का खर्चा चलाने के लिए अंपायरिंग तक की। सोचिए, एक बच्चा जो खुद क्रिकेटर बनना चाहता है, वो दूसरों के लिए अंपायरिंग कर रहा था ताकि अपने सपनों को ज़िंदा रख सके।
संघर्ष से सफलता तक
इंदौर में MPCA अकादमी में उन्हें कोच अमय खुरासिया का साथ मिला, जिन्होंने उनकी काबिलियत को पहचाना और निखारने में मदद की। आशुतोष सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन 2020 में टीम के कोच के बदलने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया – बावजूद इसके कि उनका प्रदर्शन शानदार था।
फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। मेहनत करते रहे और आखिरकार साल 2024 में पंजाब किंग्स से उन्हें IPL का पहला कॉन्ट्रैक्ट मिला – सिर्फ 20 लाख में। लेकिन किस्मत ने अभी और बड़ा तोहफा देना बाकी रखा था।
3.8 करोड़ की छलांग
2025 की IPL नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने आशुतोष को 3.8 करोड़ रुपये में खरीद लिया – यानी एक साल में 20 लाख से सीधे 3.8 करोड़ का उछाल! ये सिर्फ पैसों की बात नहीं है, ये उस मेहनत, धैर्य और जुनून की जीत है जो उन्होंने सालों तक बिना रुके निभाया।
लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ जब दिल्ली का स्कोर लड़खड़ा रहा था, तब आशुतोष ने न सिर्फ टिककर खेला, बल्कि टीम को जीत की दहलीज पर भी पहुंचाया। उनकी बल्लेबाजी में संयम, धैर्य और स्ट्राइक रोटेशन के साथ पावर हिटिंग भी देखने को मिली – एक कंप्लीट फिनिशर की तरह।