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Soul : दक्षिण कोरिया की राजनीति में हलचल मचाने वाले घटनाक्रम के तहत, सोमवार को संवैधानिक न्यायालय ने प्रधानमंत्री हान डक-सू के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद हान को दोबारा कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में बहाल कर दिया गया। कोर्ट के आठ न्यायाधीशों में से पांच ने इस प्रस्ताव को खारिज करने के पक्ष में मतदान किया, जबकि केवल एक न्यायाधीश ने इसके पक्ष में मतदान किया और दो ने प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करने के पक्ष में वोट डाला।

महाभियोग की पृष्ठभूमि

यह निर्णय दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली द्वारा प्रधानमंत्री और तत्कालीन कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू के खिलाफ महाभियोग पारित किए जाने के तीन महीने बाद आया है। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हान पर आरोप था कि उन्होंने 3 दिसंबर को राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा घोषित मार्शल लॉ में कथित भूमिका निभाई थी। इस कदम को असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ माना गया था।

न्यायालय का निर्णय और जजों की राय

पांच जजों ने महाभियोग को खारिज करने का समर्थन किया, लेकिन इनमें से चार ने यह भी माना कि हान द्वारा कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति को स्थगित करना संविधान और कानून का उल्लंघन था। फिर भी, उनका मत था कि यह उल्लंघन इतना गंभीर नहीं था कि इसके आधार पर प्रधानमंत्री को उनके पद से हटाया जाए।

वहीं, जज चुंग के-सन, जो महाभियोग को बनाए रखने वाले इकलौते जज थे, ने कहा कि हान का व्यवहार इतना गंभीर था कि उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद हान डक-सू अपने कार्यालय पहुंचे और उन्होंने कहा, "मैं संवैधानिक न्यायालय का उनके बुद्धिमत्तापूर्ण फैसले के लिए आभार व्यक्त करता हूं। अब मैं देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर फौरन काम शुरू करूंगा।"

आने वाले फैसलों पर नजर

सोमवार के इस फैसले को राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ चल रहे महाभियोग मुकदमे के संभावित फैसले की दिशा में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अदालत ने अभी तक यून के मामले में अपने निर्णय की तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह सप्ताह के अंत तक सामने आ सकता है।

मार्शल लॉ की घोषणा और उसका प्रभाव

उल्लेखनीय है कि 3 दिसंबर की रात को राष्ट्रपति यून ने दक्षिण कोरिया में आपातकालीन मार्शल लॉ की घोषणा की थी, जिसे संसद द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा। लेकिन इस अल्पकालिक निर्णय ने देश की राजनीतिक स्थिरता को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इसके जवाब में नेशनल असेंबली ने पहले राष्ट्रपति यून और फिर उनके स्थान पर नियुक्त कार्यवाहक राष्ट्रपति हान के खिलाफ महाभियोग पारित किया।

इस संवैधानिक संकट के बाद उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री चोई सांग-मोक को अस्थायी रूप से कार्यवाहक राष्ट्रपति और कार्यवाहक प्रधानमंत्री दोनों का दायित्व संभालना पड़ा था।

यह घटनाक्रम दक्षिण कोरिया की संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की परीक्षा बन गया, जिसमें न्यायालय के फैसले ने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है।