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Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष यह व्रत 21 मार्च 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे बसौड़ा भी कहा जाता है। यह दिन मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता की देवी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शीतला चेचक और त्वचा रोगों को ठीक करने वाली देवी हैं और उन्हें देवी पार्वती का रूप माना जाता है।

इस दिन विशेष रूप से व्रत रखा जाता है और बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक परंपरा और वैज्ञानिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस दिन बासी भोजन खाने का कारण।

शीतला अष्टमी का महत्व

शीतला अष्टमी का व्रत स्वास्थ्य, स्वच्छता और समृद्धि से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां शीतला की पूजा करने से संक्रामक रोगों, विशेषकर त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।

मां शीतला को ठंडी चीज़ें प्रिय होती हैं, इसलिए इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना भोजन ही प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस परंपरा को बसौड़ा पर्व कहा जाता है। मान्यता है कि इससे शरीर में ठंडक बनी रहती है और गर्मी के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव होता है।

इस व्रत का पालन करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है, साथ ही बच्चों को बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

शीतला अष्टमी पर बासी भोजन क्यों खाया जाता है?

शीतला अष्टमी पर घर में चूल्हा जलाना वर्जित माना जाता है। इसलिए इस दिन एक दिन पहले ही भोजन बना लिया जाता है, जिसे अगले दिन देवी को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, मां शीतला को बासी भोजन अत्यंत प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि गर्म भोजन या चूल्हे की गर्मी से शरीर में उष्णता बढ़ सकती है, जिससे त्वचा रोग, चेचक और अन्य संक्रमण हो सकते हैं।

वैज्ञानिक कारण

गर्मियों के मौसम में संक्रमण और चेचक, फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियां फैलने का खतरा अधिक रहता है। पुराने समय में रेफ्रिजरेशन की सुविधा नहीं थी, इसलिए लोग एक दिन पहले बना ठंडा भोजन ग्रहण करते थे, जिससे गर्मी के कारण शरीर को ठंडक मिलती थी और पाचन भी बेहतर रहता था।

इस दिन देवी को खास प्रसाद अर्पित किया जाता है, जिसमें शामिल होते हैं:

  • ओलिया (दही और चावल से बना पकवान)
  • खाजा
  • चूरमा
  • पकौड़ी
  • पूड़ी
  • राबड़ी आदि।

भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटा जाता है।

शीतला अष्टमी 2025 का शुभ मुहूर्त

पूजा का समय:

21 मार्च 2025 को सुबह 6:24 बजे से शाम 6:33 बजे तक।

विशेष योग:

सिद्धि योग – शाम 6:42 बजे तक रहेगा। इस योग में पूजा करने से सफलता और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
रवि योग – इस दिन रवि योग भी रहेगा, जिससे स्वास्थ्य और आरोग्य का वरदान प्राप्त होगा।

शीतला अष्टमी की पूजा विधि

शीतला अष्टमी के दिन विशेष पूजा और व्रत विधि का पालन किया जाता है।

पूजा विधि स्टेप बाय स्टेप:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
मां शीतला की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और उन पर हल्दी, रोली, मौली, अक्षत (चावल), फूल चढ़ाएं।
 मां शीतला को ठंडा जल अर्पित करें।
एक दिन पहले बनाए गए पकवानों का भोग लगाएं, जैसे – ओलिया, खाजा, चूरमा, पकौड़ी, पूड़ी, राबड़ी आदि।
 शीतला माता की कथा पढ़ें और आरती करें।
 घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।

नोट: इस दिन चूल्हा जलाना वर्जित होता है, इसलिए पहले से भोजन तैयार करना चाहिए।

शीतला अष्टमी व्रत के लाभ

त्वचा रोगों से मुक्ति – मां शीतला की पूजा करने से चेचक, फोड़े-फुंसी और अन्य संक्रमण से बचाव होता है।
परिवार की सुख-समृद्धि – यह व्रत करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
 बच्चों के लिए विशेष लाभकारी – यह व्रत विशेष रूप से बच्चों को संक्रमण और बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है।
 स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश – इस व्रत के माध्यम से स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जाता है।