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बेंगलुरु: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अपनी 53वीं मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो दर को 0.25% घटाकर 6.25% कर दिया है। यह कदम आर्थिक विकास को तेज़ी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

भारत की आर्थिक स्थिति और जीडीपी अनुमान

विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4% रहने की संभावना है। हालाँकि, सेवा और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में सुस्ती के कारण विकास दर पर दबाव बना हुआ है।

ब्याज दरों में लगातार गिरावट

हाल के महीनों में रेपो दर में गिरावट का रुझान देखा गया है:

  • अक्टूबर 2024: 6.2%
  • दिसंबर 2024: 6.2%
  • फरवरी 2025: 6.25%

कोर मुद्रास्फीति पर काबू पाया गया है, और ऊर्जा क्षेत्र में कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है।

कृषि और केंद्रीय बजट का असर

  • रबी की अच्छी फसल की उम्मीद से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
  • 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित कर प्रोत्साहन और पूंजीगत व्यय से निजी खपत को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
  • यदि कृषि उत्पादन में सुधार होता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।

आरबीआई का संतुलित रुख: आर्थिक स्थिरता की ओर कदम

वैश्विक वित्तीय अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अस्थिरता, व्यापार नीतियों में बदलाव और मौसम से जुड़ी चुनौतियाँ भी भविष्य की आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरबीआई संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

आगामी मौद्रिक नीति बैठक और संभावनाएँ

MPC अपनी अगली बैठक 7-9 अप्रैल, 2025 के दौरान आयोजित करेगी, जिसमें आर्थिक स्थिति का आकलन कर आगे की ब्याज दर नीति पर फैसला लिया जाएगा।

अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

  • कृषि क्षेत्र: अच्छी फसल से खाद्य कीमतों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन मौसम का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।
  • स्वास्थ्य एवं शिक्षा: कम ब्याज दरों से इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
  • रियल एस्टेट: होम लोन दरों में कटौती से संपत्ति की खरीद में वृद्धि हो सकती है।