img

Pradosh Vrat Date : प्रदोष व्रत एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत है, जो विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से जीवन के सभी दुख, परेशानियां, रोग और कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान शिव की कृपा से साधक को आरोग्यता, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। जब हम पूरे मन से भोलेनाथ का ध्यान करते हैं, तब वह हमारी हर मनोकामना सुनते हैं और जीवन को खुशहाल बना देते हैं। खासकर प्रदोष व्रत के दिन की गई शिव उपासना का महत्व कई गुना अधिक होता है।

चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत: शुभ दिन और तिथि

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 मार्च की रात 1:43 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 27 मार्च की रात 11:13 बजे होगा। इस बार का पहला प्रदोष व्रत 27 मार्च को गुरुवार के दिन रखा जाएगा। इसे ‘गुरुवार प्रदोष व्रत’ कहा जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्रदोष काल में पूजा का महत्त्वपूर्ण समय

प्रदोष व्रत की पूजा खासकर ‘प्रदोष काल’ में की जाती है। यह काल सूर्यास्त से पहले और उसके बाद का लगभग ढाई घंटे का समय होता है। 27 मार्च को यह समय शाम 6:36 बजे से रात 8:56 बजे तक रहेगा। इसी समय में शिवलिंग की पूजा और मंत्र जाप करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह वह समय होता है जब भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में तांडव करते हैं और भक्तों को वरदान प्रदान करते हैं।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि: कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न

प्रात:काल की शुरुआत स्नान से करें – प्रदोष व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प लें – भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें कि आप पूरे दिन उपवास रखेंगे और संध्या के समय पूजा करेंगे।

शिवलिंग का अभिषेक करें – गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। यह पंचामृत अभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है।

बेलपत्र, फल-फूल और धूप-दीप अर्पित करें – भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। बेलपत्र में तीन पत्तियां होनी चाहिए जो त्रिनेत्र शिव के प्रतीक मानी जाती हैं।

शिव चालीसा और मंत्र जाप करें – शिव चालीसा का पाठ करें और नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें। अंत में शिव आरती करें और प्रसाद बांटें।

शिव मंत्र: जो देंगे अद्भुत लाभ और वरदान

भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने से मन को शांति, शरीर को बल और आत्मा को ऊर्जा प्राप्त होती है। कुछ प्रभावशाली शिव मंत्र जो प्रदोष व्रत के दिन जाप करने चाहिए:

ॐ नमः शिवाय – यह पंचाक्षरी मंत्र है जो जीवन के हर संकट से मुक्ति दिलाता है।

ॐ पार्वतीपतये नमः – भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद पाने वाला मंत्र।

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय – शक्ति और शिव का संयुक्त मंत्र जो सिद्धि और समृद्धि देता है।

नमो नीलकण्ठाय – विष को भी अमृत बनाने वाले शिव की स्तुति।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे... – महामृत्युंजय मंत्र, जो आरोग्यता और दीर्घायु देता है।

कुछ विशिष्ट शिव प्रार्थनाएं: विशेष फलदायक स्तोत्र

हे गौरी शंकरार्धांगी – यह प्रार्थना विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। इसे पढ़ने से अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

दुष्ट स्वप्न और रोग नाशक स्तोत्र – यह दुर्भिक्ष, रोग, दुःस्वप्न और दुर्भावनाओं को नष्ट करने वाला श्लोक है। इसे श्रद्धा से पढ़ने पर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

???? Continue Generating?