
Chaitra Navratri Vrat Niyam: क्या आप भी पहली बार रखने जा रहे हैं नवरात्रि का व्रत, तो जान लें इस दौरान क्या खाएं और क्या नहीं.
1. नवरात्रि क्या है और क्यों मनाई जाती है?
नवरात्रि एक बेहद पावन और आध्यात्मिक हिंदू त्योहार है, जिसे मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। ‘नवरात्रि’ का शाब्दिक अर्थ होता है – ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। साल में कुल चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है और इन्हें बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
2025 में नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल को होगा। इन नौ दिनों के दौरान भक्त उपवास रखते हैं, व्रत नियमों का पालन करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मां दुर्गा को भोग अर्पित करते हैं। इस दौरान घरों में शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण होता है।
2. नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा
हर दिन एक अलग देवी के रूप को समर्पित होता है और उनकी पूजा विशेष विधि से की जाती है। ये नौ रूप इस प्रकार हैं:
शैलपुत्री
ब्रह्मचारिणी
चंद्रघंटा
कूष्मांडा
स्कंदमाता
कात्यायनी
कालरात्रि
महागौरी
सिद्धिदात्री
हर देवी के स्वरूप के अनुसार उन्हें अर्पित किया जाने वाला भोग भी अलग होता है। उदाहरण के लिए, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई चढ़ाई जाती है, जबकि मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और फल अर्पित किए जाते हैं। यह विविधता केवल धार्मिक भावना नहीं दर्शाती बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य और मौसम के अनुरूप आहार का भी विचार होता है।
3. नवरात्रि और रंगों का महत्व
नवरात्रि के नौ दिन केवल उपवास और पूजा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रंगों का भी इसमें विशेष स्थान होता है। हर दिन का एक विशेष रंग होता है जो उस दिन की देवी के गुणों का प्रतीक होता है। लोग इन रंगों के अनुसार कपड़े पहनते हैं और भोग भी उसी रंग के खाद्य पदार्थों से तैयार करते हैं। इससे पूरे वातावरण में एक समरसता और उल्लास का अनुभव होता है।
4. नवरात्रि उपवास का महत्व (Importance of Navratri Fasting)
नवरात्रि का उपवास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं। नवरात्रि हमेशा ऋतु परिवर्तन के समय आती है – जैसे शीत से गर्मी या वर्षा से शरद ऋतु की ओर। यह समय हमारे शरीर के लिए काफी संवेदनशील होता है, और ऐसे में अगर सही आहार नहीं लिया जाए तो बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
उपवास के दौरान सात्विक और हल्का भोजन शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। यह आपके पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर को फिर से ऊर्जावान बनाता है। इसके अलावा मानसिक रूप से भी यह आत्म-संयम और अनुशासन का अभ्यास है, जो व्यक्ति को आंतरिक रूप से मजबूत बनाता है।
5. नवरात्रि व्रत के नियम (Navratri Vrat Niyam)
नवरात्रि व्रत का पालन करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना जरूरी होता है। यह नियम हमारे शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखने के लिए बनाए गए हैं।
मांस, मछली, अंडे जैसे नॉन-वेज पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
शराब और धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित होता है।
प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से भी परहेज़ करना चाहिए।
दाल, अनाज और सामान्य आटे की जगह उपवास के अनुकूल विकल्पों को अपनाया जाता है।
इन नियमों का पालन न केवल पूजा की पवित्रता को बनाए रखता है बल्कि शरीर को भी सात्विक भोजन देकर ऊर्जा प्रदान करता है।