
Chaitra Navratri 2025 Ashtami : इस साल चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन शनिवार को मनाया जाएगा। नवरात्रि का यह दिन ‘महाष्टमी’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा होती है। मां महागौरी का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और आकर्षक होता है। उनके रूप की तुलना शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल से की जाती है, इसलिए उन्हें 'श्वेताम्बरधरा' और 'महागौरी' कहा जाता है। उनके उज्जवल रूप और पवित्रता के कारण भक्त विशेष भाव से इनकी उपासना करते हैं।
माता महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है, ठीक उसी प्रकार जैसे मां शैलपुत्री का वाहन होता है। इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। उनके चार हाथ हैं—दाहिनी ओर ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में रहता है, जिससे वह अपने भक्तों को निर्भयता प्रदान करती हैं। नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किए होता है। बाईं ओर ऊपर वाले हाथ में डमरू है और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में होता है, जो आशीर्वाद देने का प्रतीक है।
मां महागौरी को रात की रानी का फूल बेहद प्रिय है। जो व्यक्ति अपने जीवन में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और मानसिक शांति चाहता है, उन्हें इस दिन मां की विशेष पूजा करनी चाहिए। यह दिन आत्मशुद्धि और अंतर्मन को उजाले से भरने का प्रतीक माना जाता है।
महाष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 4 अप्रैल, रात 8:12 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 5 अप्रैल, शाम 7:26 बजे
इस अवधि में माता महागौरी की पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है। शुभ मुहूर्त में पूजा करना अधिक फलदायी माना जाता है।
महाष्टमी के दिन जपें ये पवित्र मंत्र
मां महागौरी की आराधना के लिए विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ फल देता है। इन मंत्रों का उच्चारण ध्यान और भावनाओं के साथ करने से भक्त को मां की कृपा प्राप्त होती है।
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
इन मंत्रों का जप ध्यानपूर्वक करें और मां से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
मां को अर्पित करें ये भोग सामग्री
माता महागौरी को शुद्ध और सात्विक भोजन अर्पण किया जाता है। विशेष रूप से कन्या पूजन के लिए भी ये व्यंजन बनाए जाते हैं:
हलवा-पूड़ी
काले चने
खीर
लड्डू
फल
नारियल और उससे बनी मिठाइयां
भक्त इन भोगों को श्रद्धा के साथ मां को अर्पित करते हैं, फिर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
महाष्टमी पर कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन कन्या पूजन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। घर की पवित्रता, समृद्धि और देवी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें:
पहले पैर धोकर बैठाया जाता है।
फिर उन्हें हलवा-पूड़ी, काले चने और खीर का भोजन कराया जाता है।
भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा, उपहार और चुनरी देकर विदा किया जाता है।
यह माना जाता है कि कन्याओं का आशीर्वाद लेने से घर में सुख, शांति और वैभव हमेशा बना रहता है।