
संसद में वक्फ बिल पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 5 मार्च 2014 को, जब चुनाव सिर पर थे, तब दिल्ली की 123 प्रमुख संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया। यह फैसला राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से लिया गया था। कांग्रेस को लगा कि इस कदम से अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधा जा सकेगा, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव हार गई। रिजिजू ने कहा कि ये दिखाता है कि जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है।
वक्फ के पात्र कौन होंगे
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि वक्फ वही व्यक्ति बना सकता है जिसने कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन किया हो। उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी जगह दी जाएगी। कुल मिलाकर 4 गैर मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल होंगी। यह निर्णय देश की विविधता और समावेशिता को दर्शाता है।
सेंट्रल वक्फ काउंसिल की संरचना
मंत्री ने बताया कि केंद्रीय वक्फ काउंसिल में कुल 22 सदस्य होंगे। इनमें से 10 सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जबकि अधिकतम 4 गैर मुस्लिम सदस्य होंगे। इसके अलावा, काउंसिल में 3 सांसद, 2 पूर्व न्यायाधीश (सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से), और एक एडवोकेट को शामिल किया जाएगा। यह विविध समूह सुनिश्चित करेगा कि सभी हितधारकों की आवाज़ सुनी जाए और पारदर्शिता बनी रहे।
वक्फ संपत्तियों की स्थिति पर बड़ा बयान
रिजिजू ने एक अहम बात साझा की कि भारत में सबसे अधिक जमीन अगर किसी के पास है तो वह भारतीय रेलवे है। दूसरे नंबर पर डिफेंस और तीसरे नंबर पर वक्फ बोर्ड आता है। उन्होंने कहा कि रेलवे ने देशभर में हजारों किलोमीटर पटरी बिछाई है, लेकिन वह रेलवे की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि देश की है। इसी तरह डिफेंस की संपत्ति भी देश की होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि वक्फ की संपत्ति सबसे ज्यादा होने के बावजूद देश का मुसलमान गरीब क्यों है? आखिर 60 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी अल्पसंख्यकों के लिए क्या ठोस काम हुआ?
वक्फ बिल की प्रमुख बातें
पहले से रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी पर कोई हस्तक्षेप नहीं – वक्फ बिल में साफ किया गया है कि जो संपत्ति पहले से वक्फ के तहत रजिस्टर्ड है, उस पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
यह कानून किसी की जमीन छीनने के लिए नहीं है – बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि यह किसी की निजी संपत्ति को हड़पने का माध्यम नहीं है।
कोर्ट में लंबित मामलों में सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी – जो प्रॉपर्टी विवाद में है और कोर्ट में लंबित है, उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी।
वक्फ केवल पूरी तरह से व्यक्तिगत हिस्से वाली संपत्ति पर ही हो सकेगा – बच्चों और महिलाओं के हिस्से की जमीन को वक्फ नहीं किया जा सकता।
सरकारी और विवादित जमीन पर नजर रखने के लिए अधिकारी नियुक्त होंगे – कलेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी यह देखेंगे कि कौन सी जमीन सरकारी है और कौन सी विवादित।
आदिवासी क्षेत्रों में वक्फ की अनुमति नहीं – संविधान की अनुसूचित 5 और अनुसूचित 6 की भावना को ध्यान में रखते हुए, इन क्षेत्रों में वक्फ संपत्ति नहीं बनाई जा सकती।
वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 सदस्य होंगे – इनका कार्यकाल 6 साल का होगा और ये वक्फ से जुड़े विवादों का निपटारा करेंगे।
यह बयान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वक्फ प्रॉपर्टी के प्रबंधन और पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। इससे न केवल मुस्लिम समुदाय को बेहतर प्रबंधन मिलेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग सही तरीके से हो और समाज के व्यापक हित में किया जाए।