
Ketu impact on kundali : आठवां भाव ज्योतिष में रहस्यों, शोध, आध्यात्मिकता, मोक्ष, गुप्त विद्याओं, आकस्मिक घटनाओं और स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करता है। जब इस भाव में केतु स्थित होता है, तो यह व्यक्ति के जीवन में गहराई, रहस्य, आत्मविश्लेषण और कुछ अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव लेकर आता है। हालांकि केतु को आमतौर पर छाया ग्रह और कुछ हद तक अशुभ माना जाता है, लेकिन यदि यह शुभ प्रभावों के साथ हो तो जीवन में कुछ दुर्लभ उपलब्धियां भी दिला सकता है।
केतु के सकारात्मक प्रभाव: आध्यात्मिक उन्नति और आर्थिक लाभ
जब आठवें भाव में केतु शुभ स्थिति में होता है या किसी शुभ ग्रह के साथ युति करता है, तो यह व्यक्ति को आध्यात्मिक गहराई देता है। ऐसा जातक गूढ़ विषयों, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, ध्यान और योग जैसे विषयों में रुचि लेने लगता है। इस भाव का संबंध मोक्ष से होने के कारण जातक सांसारिक बंधनों से ऊपर उठने की इच्छा रखने लगता है।
आर्थिक रूप से भी केतु का यह स्थान लाभकारी हो सकता है। व्यक्ति को अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है, जैसे विरासत, बीमा, शेयर मार्केट आदि से लाभ। सरकार से भी आर्थिक लाभ की संभावना बन सकती है। कुछ लोगों में यह प्रभाव खेलकूद और रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि के रूप में भी सामने आता है।
शारीरिक प्रभाव: स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता जरूरी
हालांकि केतु आध्यात्मिक दृष्टि से जागरूकता देता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह कुछ समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। आठवां भाव शरीर के अंदरूनी अंगों से जुड़ा होता है, और केतु यहां होने पर व्यक्ति को मधुमेह, मूत्र संबंधी रोग, त्वचा की एलर्जी, और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसके अलावा, इस भाव में केतु के कारण जहरीले कीड़ों के काटने, चोट लगने या आकस्मिक सर्जरी की संभावना भी रहती है। इसलिए ऐसे जातकों को सतर्क रहना चाहिए, विशेष रूप से जब किसी जोखिम भरे कार्य में संलग्न हों।
केतु के नकारात्मक प्रभाव: भ्रम, भय और अस्थिरता
आठवें भाव में केतु यदि नीच स्थिति में हो या पाप ग्रहों के प्रभाव में हो, तो यह कई प्रकार की मानसिक और सामाजिक परेशानियां ला सकता है। जातक की संगति गलत लोगों से हो सकती है, जिससे उसका चरित्र या सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। ऐसे व्यक्ति में लालच, चालाकी और छल का भाव देखा जा सकता है।
केतु भ्रम पैदा करता है, जिससे जातक को निर्णय लेने में कठिनाई होती है। यह व्यक्ति को अस्थिर मानसिक स्थिति में डाल सकता है, जिसके चलते वह जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को खो सकता है। दोस्तों और प्रियजनों से दूरी, गुप्त शत्रु, और दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। ऐसे लोग अकसर दूसरों की तकलीफों की परवाह नहीं करते और आत्मकेंद्रित व्यवहार दिखाते हैं।
वैवाहिक जीवन पर असर: रिश्तों में दूरी और असंतुलन
आठवां भाव विवाह के बाद के जीवन को भी दर्शाता है। यहां स्थित केतु दांपत्य जीवन में भावनात्मक दूरी पैदा कर सकता है। व्यक्ति का जीवनसाथी बार-बार बीमार पड़ सकता है या दोनों के बीच समझदारी की कमी रह सकती है। इसका असर शादीशुदा जीवन पर नकारात्मक रूप से पड़ता है।
अक्सर देखा गया है कि इस स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में विश्वास की कमी, तर्क-वितर्क और संबंधों में ठंडापन आ जाता है। कई बार तो यह स्थिति तलाक या कानूनी विवादों तक भी पहुँच सकती है। इसलिए इस योग के जातकों को अपने संबंधों में पारदर्शिता और धैर्य बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
करियर और पेशेवर जीवन में प्रभाव: उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता
केतु का आठवें भाव में होना करियर में अस्थिरता और बाधाओं का संकेत देता है। जातक किसी भी काम की शुरुआत बड़े जोश से करता है, लेकिन अक्सर बीच में ही उसे छोड़ देता है। यह स्थायित्व की कमी और मानसिक असमंजस का संकेत है।
ऐसे लोग मेहनती होते हैं, लेकिन उन्हें उनका मेहनताना नहीं मिल पाता। कई बार अच्छे काम के बावजूद प्रमोशन नहीं होता, या आय में अनियमितता बनी रहती है। व्यापार में बार-बार रुकावटें आती हैं, और साझेदारियों में धोखा भी हो सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए जातक को आत्मविश्वास, संयम और सही दिशा में मेहनत करने की जरूरत होती है।