
US Reciprocal Tariff Impact : अमेरिका द्वारा लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ का असर वैश्विक व्यापार पर साफ दिखाई देगा, लेकिन इसके बीच भारत के लिए एक सुनहरा अवसर उभरता दिख रहा है। जहां चीन जैसे देश 65 प्रतिशत या उससे भी अधिक टैरिफ के दबाव में हैं, वहीं भारत पर केवल 27 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत को अमेरिका ने उतनी गंभीरता से टारगेट नहीं किया है जितना चीन को, जिससे भारत को व्यापार के नए रास्ते तलाशने का मौका मिल रहा है।
भारत के पारंपरिक निर्यात क्षेत्र—जैसे इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न-आभूषण, कपड़ा और परिधान—के अलावा अब ऐसे नए सेक्टर्स में भी अवसर पैदा हो सकते हैं, जहां प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम हो और अमेरिका भारतीय उत्पादों के प्रति अधिक सकारात्मक रुख अपनाए।
बदलती रणनीति और नई संभावनाएं
ईवाई इंडिया के व्यापार नीति विशेषज्ञ अग्नेश्वर सेन के मुताबिक, इन टैरिफ्स की वजह से कई ऐसे सेक्टर्स में भी भारत को फायदा हो सकता है, जहां भारत पहले दूसरे देशों से पिछड़ रहा था। अगर भारत अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी को बनाए रखना और बढ़ाना चाहता है, तो उसे रणनीतिक स्तर पर अमेरिका के साथ फिर से बातचीत करनी होगी। साथ ही, भारत को अपने सप्लाई चेन को दोबारा स्ट्रक्चर करने की जरूरत है और एशिया के अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पार्टनर्स के साथ मजबूत सहयोग करना होगा।
100 अरब डॉलर के पार जा सकता है द्विपक्षीय व्यापार
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी से वृद्धि हो रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने अमेरिका को करीब 10 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात किया। इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा 80 अरब डॉलर प्रतिवर्ष तक पहुंच सकता है। बशर्ते कि सरकार निरंतर नीति समर्थन दे और टैरिफ सिस्टम अनुकूल बना रहे। ऐसी स्थिति में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है।
क्या अमेरिका के टैरिफ से भारत को फायदा हो सकता है?
विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका के टैरिफ्स का भारत पर थोड़ा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन कुल मिलाकर भारत इससे फायदा उठा सकता है। इसकी एक वजह यह है कि चीन पर लगाए गए संचयी टैरिफ—जिसमें पहले से लागू टैरिफ भी शामिल हैं—लगभग 54 प्रतिशत से 154 प्रतिशत तक हैं। वहीं वियतनाम को भी 46 प्रतिशत तक टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। भारत की तुलना में ये दरें कहीं अधिक हैं, जो भारत को अमेरिकी बाजार में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनाती हैं।
ICEA के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू ने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार को असली गति तब मिलेगी, जब दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को शीघ्रता से अंतिम रूप देंगे।
कार सेगमेंट में भारत के लिए बड़ा मौका
ईवाई इंडिया के ऑटोमोटिव टैक्स लीडर सौरभ अग्रवाल का मानना है कि भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर के पास अमेरिकी बाजार में खासकर बजट कार सेगमेंट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने का एक बेहतरीन अवसर है। उन्होंने बताया कि 2023 में चीन ने अमेरिका को ऑटो और कंपोनेंट्स का 17.99 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि भारत का यही आंकड़ा 2024 में केवल 2.1 अरब डॉलर था। यह अंतर दर्शाता है कि भारत के लिए इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यदि सही रणनीति अपनाई गई, तो भारत इस अंतर को कम कर सकता है।