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US Stock Markets Crash : डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा टैरिफ फैसले ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों को गहरे झटके में डाल दिया है। गुरुवार को जैसे ही उन्होंने अपने टैरिफ नीति की घोषणा की, अमेरिकी शेयर बाजार बुरी तरह डगमगा गया। वॉल स्ट्रीट के बड़े-बड़े इंडेक्स एक ही दिन में नीचे गिर गए और लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू हवा हो गई। निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है, और एक वैश्विक टैरिफ वॉर की आशंका अब और भी गहरी होती जा रही है।

बड़ी गिरावट: Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq में भूचाल

गुरुवार को Dow Jones 1,700 अंकों की भारी गिरावट के साथ करेक्शन ज़ोन में आ गया। यानी यह अब अपने पिछली ऊंचाई से 10% नीचे जा चुका है। S&P 500 में 5% की गिरावट आई, जबकि Nasdaq करीब 6% लुढ़क गया। यह अचानक की गई घोषणा न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आर्थिक चेतावनी के रूप में सामने आई है।

टेक और रिटेल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

ट्रंप के टैरिफ फैसले का सबसे बड़ा झटका टेक्नोलॉजी और रिटेल सेक्टर को लगा। Apple के शेयर 9% से अधिक गिर गए। ऐसा इसलिए क्योंकि Apple के ज्यादातर उत्पाद एशियाई देशों में मैन्युफैक्चर होते हैं। इसका असर iPhone जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे बिक्री में गिरावट और मुनाफे में कटौती संभव है। कंपनी को अकेले करीब 40 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

Nike के शेयर 14% तक टूटे, जबकि Dell और HP जैसे ब्रांड्स 17% तक गिर गए। फैशन रिटेल ब्रांड Gap के शेयरों में 20% तक की गिरावट दर्ज की गई। Amazon, Walmart और Target जैसी कंपनियां जो अपने प्रोडक्ट्स का आयात चीन और अन्य एशियाई देशों से करती हैं, वे भी इस फैसले से प्रभावित हुईं। उनके लिए लागत बढ़ने और प्रोडक्ट्स महंगे होने की आशंका है।

बैंकिंग और ऑटो सेक्टर भी नहीं बच पाए

ट्रंप के टैरिफ से सिर्फ टेक और रिटेल नहीं, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। JP Morgan Chase, Citigroup और Bank of America जैसे बड़े बैंक शेयर बाजार की गिरावट में शामिल हो गए। निवेशकों में मंदी की आशंका ने इन बैंकों में भरोसे को कमजोर किया है।

ऑटो इंडस्ट्री पर भी टैरिफ का गहरा असर पड़ा है। Ford, General Motors और Tesla जैसे दिग्गज ब्रांड्स के शेयर 3% से 6% तक गिर गए। Jeep बनाने वाली Stellantis ने कनाडा और मेक्सिको में अपनी कुछ फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन रोकने का फैसला लिया है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

डॉलर और क्रिप्टोकरेंसी को भी झटका

डॉलर इंडेक्स गिरकर 102 के नीचे आ गया है। अमेरिकी डॉलर, यूरो के मुकाबले 2.6% तक गिर गया – जो पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इसी बीच, क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में भी हलचल मच गई है। बिटकॉइन की कीमत 4.5% और ईथर की 5.5% गिर गई है।

सोने और कच्चे तेल में मिला मिक्स्ड रिएक्शन

अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने सेफ हेवन माने जाने वाले गोल्ड की ओर रुख किया। सोने की कीमत 3,167 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, हालांकि बाद में मुनाफा वसूली के चलते इसमें थोड़ी गिरावट आई। कच्चा तेल (WTI Crude) भी 6.9% गिरकर $66.74 पर आ गया, क्योंकि मंदी की आशंका से डिमांड घटने का डर सताने लगा है।

क्या है ट्रंप का नया टैरिफ फॉर्मूला?

ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया कि अमेरिका अब सभी आयातों पर न्यूनतम 10% टैरिफ लगाएगा। कुछ देशों के लिए यह दर 25% तक जा सकती है। चीन से आने वाले प्रोडक्ट्स पर 54% तक का टैरिफ लगाया गया है। वियतनाम पर 46%, कंबोडिया पर 49%, और इंडोनेशिया पर 32% का टैरिफ लागू किया गया है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका को व्यापारिक संतुलन बनाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी था।

ग्लोबल मार्केट्स में भी हलचल

ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिका के बाहर के शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। जापान का Nikkei इंडेक्स 4% से ज्यादा गिर गया, जबकि यूरोप के पेरिस और फ्रैंकफर्ट मार्केट्स में भी 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह असर अब भारत समेत अन्य उभरते बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है, क्योंकि निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूर भागते हैं।