
US Stock Market : चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का जवाब देते हुए शुक्रवार को बड़ा आर्थिक कदम उठाया। चीन ने अमेरिका से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 34 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला 10 अप्रैल से लागू होगा। इससे पहले अमेरिका ने चीनी सामानों पर कुल 54 प्रतिशत (34% मौजूदा + 20% नया) टैरिफ लगाया था, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालने की कोशिश की गई थी।
चीन का यह जवाबी हमला केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है। इसकी सीधी मार उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ी है जो चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करती हैं। खासकर टेक्नोलॉजी, ऑटो और कंज़्यूमर गुड्स सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को इस फैसले से तगड़ा झटका लगा है।
अमेरिकी शेयर बाजार में हड़कंप
चीन के इस निर्णय के तुरंत बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया है, और इसका असर प्रमुख स्टॉक इंडेक्स पर साफ नजर आया। शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट पर व्यापक गिरावट देखने को मिली, जो कि इस साल की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है।
वॉल स्ट्रीट के सूचकांकों में बड़ी गिरावट
डाउ जॉन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 3.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था, जबकि S&P 500 इंडेक्स 4.10 प्रतिशत लुढ़क गया। तकनीकी शेयरों का प्रतिनिधित्व करने वाला नैस्डेक कंपोज़िट इंडेक्स 4.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। छोटे और मझोले आकार की कंपनियों को दर्शाने वाला स्मॉल कैप-2000 इंडेक्स तो 5.92 प्रतिशत तक गिर गया।
टेक कंपनियों को लगा जबरदस्त झटका
चीन के इस टैरिफ के जवाब का सबसे बड़ा असर अमेरिका की आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियों पर पड़ा है। सेमीकंडक्टर बनाने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी एनविडिया के शेयर में 7.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एपल जैसी दिग्गज कंपनी के शेयर 4.66 प्रतिशत तक टूट गए।
इसके अलावा अन्य प्रमुख टेक कंपनियों जैसे मेटा (5.45%), माइक्रोसॉफ्ट (1.42%) और गूगल (2.06%) के शेयरों में भी गिरावट आई है। टेस्ला का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा और इसके शेयरों में 10.08 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो बताता है कि निवेशक इस खबर से कितने डरे हुए हैं।
क्रूड ऑयल बाजार भी हिला
अमेरिका की नई टैरिफ नीति का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कच्चे तेल के बाजार में भी इसका प्रभाव साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट आई। WTI क्रूड ऑयल 9.28 प्रतिशत यानी 6.21 डॉलर की गिरावट के साथ 60.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं रही, और यह 8.41 प्रतिशत या 5.93 डॉलर की गिरावट के साथ 64.25 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। यह संकेत देता है कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और टैरिफ युद्धों के चलते ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं।