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Big change in UPI payment rules : 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़ी नई गाइडलाइंस लागू कर दी गई हैं। अगर किसी यूजर का मोबाइल नंबर बैंक में लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उस यूजर की UPI ID अब स्वतः ही अनलिंक कर दी जाएगी। इसका मतलब है कि अब ऐसे यूजर्स यूपीआई के जरिए भुगतान नहीं कर पाएंगे। यह कदम नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा ग्राहकों की सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

UPI लेनदेन में जबरदस्त उछाल

मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के जरिए लेनदेन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। फरवरी में जहां कुल 16.11 अरब ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 18.3 अरब तक पहुंच गया। यानी सिर्फ एक महीने में 13.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

24.77 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन

मार्च में यूपीआई के जरिए किए गए लेनदेन का कुल मूल्य 24.77 लाख करोड़ रुपये रहा, जो फरवरी के 21.96 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 12.79 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और लोगों का इस पर विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।

UPI के सालाना आंकड़े भी शानदार

NPCI द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में UPI ट्रांजेक्शन की वैल्यू में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, ट्रांजेक्शन की संख्या में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे यह साफ होता है कि देश में डिजिटल भुगतान की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है।

रोजाना औसतन 59 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजेक्शन

दैनिक आधार पर बात करें तो मार्च में यूपीआई के जरिए रोजाना औसतन 59 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन किए गए, जिनका औसत मूल्य करीब 79,910 करोड़ रुपये रहा। इसमें क्रमशः 2.6 प्रतिशत और 1.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

1 अप्रैल को UPI से ट्रांजेक्शन में दिक्कत

1 अप्रैल को कुछ डिजिटल पेमेंट यूजर्स को यूपीआई ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पर NPCI ने सफाई देते हुए कहा कि यह दिक्कत वित्त वर्ष 2024-25 के समापन के चलते कुछ बैंकों में आई तकनीकी अड़चनों के कारण हुई। हालांकि, NPCI ने भरोसा दिलाया कि यूपीआई सिस्टम पूरी तरह से ठीक है और बैंकों के साथ मिलकर इस समस्या को सुलझाया जा रहा है।

नए दिशानिर्देश: इनएक्टिव नंबर से नहीं होगा भुगतान

NPCI ने नए नियमों के तहत ‘न्यूमेरिक UPI ID’ समाधान पेश किया है, जिसका उद्देश्य कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाना है। इसके तहत यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर बैंक में लंबे समय तक इनएक्टिव रहता है, तो उसकी UPI ID भी निष्क्रिय हो जाएगी और उस नंबर से कोई ट्रांजेक्शन नहीं किया जा सकेगा।

बैंकों और थर्ड पार्टी ऐप्स को भी करना होगा पालन

इन नए नियमों का पालन सिर्फ यूजर्स को ही नहीं, बल्कि सभी UPI सदस्य बैंकों, UPI ऐप्स और थर्ड पार्टी पेमेंट प्रोवाइडर्स को भी करना अनिवार्य होगा। ये दिशानिर्देश 1 अप्रैल से प्रभावी हो चुके हैं।

क्या यह बदलाव सुरक्षा के लिए जरूरी था?

बिलकुल। इनएक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ी यूपीआई ID को डिएक्टिवेट करना एक अहम सुरक्षा उपाय है। इससे किसी पुराने या फिर रीसाइकल मोबाइल नंबर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगेगी और यूजर्स का डेटा और पैसा दोनों सुरक्षित रहेंगे।