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IAA Olive Crown Awards 2025 : "पहले पंखा आएगा, फिर बिजली आएगी..." यह लाइन सुनते ही आपको शायद अडानी ग्रुप की वो शॉर्ट फिल्म याद आ गई होगी, जो सोशल मीडिया और टीवी पर खासा वायरल हुई थी। इस फिल्म ने न केवल दर्शकों के दिलों को छुआ, बल्कि अब इसे प्रतिष्ठित IAA Olive Crown Awards 2025 में चार गोल्ड अवॉर्ड भी मिले हैं। अडानी ग्रुप की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह सफलता दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और चेयरमैन गौतम अडानी के मार्गदर्शन में समूह की बदली हुई कम्युनिकेशन और ब्रांडिंग रणनीति का परिणाम है।

क्या है 'हमारी पंखा' की कहानी?

इस शॉर्ट फिल्म की कहानी एक सादगी से भरे लेकिन बेहद प्रभावशाली संदेश के साथ शुरू होती है। फिल्म में एक सुदूर गांव को दिखाया गया है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। गांव का एक मासूम बच्चा 'टमटू' अपने पिता से सवाल करता है, "बिजली कब आएगी?" इस पर उसके पिता मुस्कुराते हुए कहते हैं, "पहले पंखा आएगा, फिर बिजली आएगी।"

बच्चा इस बात को गंभीरता से लेता है और अपने दोस्तों से भी यही कहता है, लेकिन उसका मज़ाक उड़ाया जाता है। धीरे-धीरे कहानी आगे बढ़ती है, और एक दिन गांव में एक विशाल पवन चक्की स्थापित होती है—बिलकुल वैसी, जैसी टमटू ने सोची थी। इससे गांव को न सिर्फ बिजली मिलती है, बल्कि उम्मीद, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी बिखरती है।

फिल्म के अंत में अडानी ग्रुप का संदेश होता है: "हम न केवल पर्यावरण से बिजली बना रहे हैं, बल्कि लोगों के जीवन में खुशियां भी बांट रहे हैं।"

इन चार श्रेणियों में मिला सम्मान

अडानी ग्रुप की इस शॉर्ट फिल्म को जिन चार श्रेणियों में गोल्ड अवॉर्ड मिले हैं, वे हैं:

कॉर्पोरेट सोशल क्रूसेडर ऑफ द ईयर – सामाजिक जिम्मेदारी और प्रभावशाली पहलों के प्रति कमिटमेंट के लिए।

ग्रीन एडवरटाइज़र ऑफ द ईयर – पर्यावरण की स्थिरता को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन अभियानों के लिए।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म, टीवीसी/सिनेमा (कॉर्पोरेट) – 'हमारी पंखा' को टेलीविजन और सिनेमा के लिए बनी सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट फिल्म का दर्जा मिला।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म, डिजिटल – डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित सर्वश्रेष्ठ फिल्म के तौर पर भी इसे मान्यता दी गई।

यह फिल्म न केवल ब्रांड की सोच को दर्शाती है, बल्कि एक बड़े सामाजिक संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनती है। अडानी ग्रुप की यह पहल दिखाती है कि कॉर्पोरेट जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी संवेदनशील और प्रेरणादायक कहानियां कही जा सकती हैं—बिना किसी बनावटीपन के, एकदम सीधे दिल तक पहुंचने वाली।