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Adani Ports : अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने मार्च 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में अब तक का सबसे ज़्यादा कार्गो हैंडल किया है, जिससे न केवल कंपनी को बल्कि भारत के समग्र लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी नई ऊँचाइयाँ मिली हैं।

मार्च 2025: ऐतिहासिक कार्गो हैंडलिंग

मार्च 2025 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि अदाणी पोर्ट्स ने कुल 41.5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो हैंडल किया है, जो कि पिछले साल की तुलना में 9% की वृद्धि है। यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ों की नहीं बल्कि कंपनी की बढ़ती परिचालन क्षमता और विश्वसनीयता का प्रमाण भी है।

कंटेनर वॉल्यूम में भी 19% की जबरदस्त वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो वैश्विक व्यापार में कंपनी की अहम भूमिका को दिखाता है। इसके अलावा, लिक्विड और गैस कार्गो के सेगमेंट में भी 5% की सालाना बढ़त दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि अदाणी पोर्ट्स बहु-आयामी विकास कर रहा है।

मुंद्रा पोर्ट ने रचा इतिहास

अदाणी ग्रुप के सबसे बड़े पोर्ट मुंद्रा पोर्ट ने वित्त वर्ष 2025 में 200.7 MMT कार्गो हैंडल करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह आंकड़ा भारत में किसी भी पोर्ट द्वारा एक वित्त वर्ष में हैंडल किए गए कार्गो में सबसे अधिक है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे की मजबूती और उसमें अदाणी पोर्ट्स की अग्रणी भूमिका का परिचायक है।

विझिंजम पोर्ट का प्रभावशाली प्रदर्शन

केरल में स्थित अदाणी ग्रुप का विझिंजम पोर्ट भी पीछे नहीं रहा। मार्च 2025 में इस पोर्ट ने 1 लाख TEUs (Twenty-foot Equivalent Units) कंटेनर सफलतापूर्वक हैंडल किए हैं। यह उपलब्धि अदाणी ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है और दक्षिण भारत में व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक नई दिशा खोलती है।

भविष्य में और भी ग्रोथ की संभावना

इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि अदाणी पोर्ट्स आने वाले समय में अपने कार्गो हैंडलिंग ऑपरेशन्स को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। कंपनी की रणनीति है कि वह देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को वैश्विक मानकों पर प्रतिस्पर्धी बनाए। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद उम्मीद है कि देशभर के पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में भी नई ऊर्जा और निवेश देखने को मिलेगा।

इस विकास का लाभ न सिर्फ अदाणी ग्रुप को बल्कि पूरे भारत के इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा, जिससे निर्यात-आयात के रास्ते और आसान व तेज़ बनेंगे।